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Home सिवनी बेटियों से सीखें, मुकाबले की मिसाल बनी बेटिया

बेटियों से सीखें, मुकाबले की मिसाल बनी बेटिया

छेड़छाड़ होने पर लोकलाज से डरकर जिंदगी को समाप्त करने की जितनी घटनाएं समाज में हो रही हैं, उनका मुकाबला करने वालों की संख्या भी उतनी ही अधिक है। हमारे आसपास कई ऐसे उदाहरण हैं, जब बेटियों ने दरिंदों से पहले अपने स्तर पर मुकाबला किया, फिर कानून का सहारा लेकर उन्हें सीखचों के पीछे पहुंचाया। घर-परिवार के सदस्यों ने भी मदद की और इस हौसले को देखकर समाज आगे आया। तो, जो डरता नहीं, वह मरता नहीं और जो मुकाबला करता है, वह जीतता है। आज पढ़िए बेटियों के साहस भरे किस्से, जिन्होंने उनकी अस्मत पर बुरी नजर डालने वालों को सबक सिखाया।


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दुनिया में माता-पिता से अच्छा दोस्त हो ही नहीं सकता। वे जीवनभर अपने बच्चों की बेहतरी के लिए सब कुछ करते हैं। गलतियां होने पर वे जितना डांटते हैं, उससे कहीं ज्यादा वे आपसे प्यार करते हैं। किसी भी तरह की ‘गलती’ होने पर किसी और की सलाह लेने के बजाय लड़कियों को अपने मातापिता को सब कुछ बता देना चाहिए। वे जो भी फैसला करते हैं, उसमें बच्चे का ही हित छिपा रहता है। यह कहना है आधी रात को पीछा कर छेड़छाड़ कर रहे मनचलों से मुकाबला करने वाली सगी बहनों का।

इसमें से 9वीं की छात्रा ने तो मनचले की बाइक पर लात मारकर उसकी चाबी निकाल ली थी। चाबी से मिले सुराग से ही पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार करने में कामयाब हो पाई थी। पेशे से एक इवेंट कंपनी में एंकर इस 24 वर्षीय युवती का कहना है कि मुझे केवल इस बात का अफसोस है कि आज भी शहर में यदि लड़के आधी रात को घूमते हैं, मौज- मस्ती करते हैं तो कोई कुछ नहीं कहता लेकिन रात में यह शहर (भोपाल) लड़कियों के लिए कतई सुरक्षित नहीं है।

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दो बहनों ने इस तरह दिखाया था साहस

16 फरवरी की रात करीब 12 बजे युवती अपनी छोटी बहन के साथ स्कूटी से घर लौट रही थी। करीब 12:15 बजे प्रगति पेट्रोल पंप के पास से बाइक सवार दो युवकों ने छेड़छाड़ करते हुए उनका पीछा करना शुरू कर दिया था। करीब डेढ़ किमी तक पीछा करते हुए वे सावरकर सेतु तक उनके पीछे गए थे। इस दौरान अमर नाम के युवक ने युवतियों की मदद करनी चाही तो मनचलों ने मारपीट शुरू कर दी थी। तब लड़कियों ने साहस दिखाते हुए उनसे मोर्चा लेना शुरू कर दिया। इस दौरान छोटी बहन ने बाइक की चाबी निकाल ली और बड़ी बहन ने पुलिस को फोन कर दिया था।

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सभ्य समाज में सम्मानजनक जीवन का हक सभी को है लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों के कारण बेटियों को बहुत परेशानी झेलना पड़ती है। छेड़छाड़ से लड़ाई को आम बनाने का समय आ चुका है। यदि इस बारे में आपके कोई सुझाव, विचार हों तो हमें नीचे दिए कमेंट बॉक्स में जानकारी दे ।


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