सिवनी। जिले में धान खरीदी को लेकर उठे गंभीर सवालों पर खबर सत्ता में प्रकाशित रिपोर्ट का बड़ा असर सामने आया है। “सिवनी में धान खरीदी पर बड़ा खेल? अमानक धान थोपने के आरोप, सर्वेयर हटाए गए—गुणवत्ता पर संकट” शीर्षक से 31 दिसंबर को प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन हरकत में आया है।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए संचालित समृद्धि वेयरहाउस साजपानी (केंद्र कोड: 59337267) का कलेक्टर के निर्देश पर विकासखंड स्तरीय उपार्जन समिति द्वारा सघन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण टीम ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की उपस्थिति में केंद्र का बारीकी से परीक्षण किया, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। इसके बाद केंद्र प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस की तामील कर दी गई है।
निरीक्षण में सामने आईं चौंकाने वाली अनियमितताएं
निरीक्षण के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं—
- केंद्र पर स्व-सहायता समूह की श्रीमती प्रेमलता सोनिया उपस्थित पाई गईं, लेकिन खरीदी कार्य का लेखा-जोखा रजिस्टर समय पर प्रस्तुत नहीं किया गया।
- तौल के समय 38.80 किलोग्राम वजनी धान की बोरियां सिलकर रखी पाई गईं, जो नियमों के विपरीत है।
- जिन बोरियों को सर्वेयर द्वारा FAQ (मानक) बताया गया था, उन्हें खोलकर सैंपलिंग कराई गई तो वे नॉन-FAQ निकलीं।
- कई बोरियों पर किसान कोड टैग अंकित नहीं था, इसके बावजूद उनकी सिलाई कर दी गई।
- बिना चालान जारी किए ही बोरियों को गोदाम के भीतर स्टैकिंग किया गया।
- स्टैक नंबर 09, जिसे पहले FAQ बताया गया था, जांच में फेल पाया गया; पंचनामा तैयार कर स्टैक फेल घोषित किया गया।
- किसानों के लिए बैठने और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं।
इन कृत्यों को उपार्जन नीति की कंडिका 8.1, 10 एवं 11.3 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है।
48 घंटे की मोहलत, नहीं दिया जवाब तो एकपक्षीय कार्रवाई
प्रशासन ने केंद्र को निर्देशित किया है कि वह 02 दिवस (48 घंटे) के भीतर लिखित जवाब के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखे। अनुपस्थिति या असंतोषजनक जवाब की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी—जिसमें केंद्र की मान्यता, जिम्मेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई और आगे की खरीदी पर रोक तक शामिल हो सकती है।
आखिर क्यों बन रही है यह स्थिति?
जानकारों के अनुसार इस सत्र में किसानों का उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहा है। ऐसे में पंजीयन पूरा कराने के लिए कुछ व्यापारी बाहर से अमानक धान मंगाकर खपाने की कोशिश कर रहे हैं। यही धान परिवहन के दौरान भंडारण केंद्रों तक पहुंच रहा है और रिजेक्ट श्रेणी में आ रहा है। हालांकि सर्वेयर और सुपरवाइजर की नियुक्ति का उद्देश्य गुणवत्ता सुनिश्चित करना है, लेकिन राजनीतिक दबाव के आरोपों के बीच अमानक धान को भी मानक दिखाकर जमा कराने के प्रयास सामने आ रहे हैं।
आगे क्या होगा? मिलिंग के वक्त खुलेगा ‘अमानक’ का सच
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं हुई, तो मिलर्स द्वारा मिलिंग के लिए धान उठाव के दौरान अमानक धान की सच्चाई उजागर होगी—जिसका आर्थिक नुकसान, सरकारी व्यवस्था की साख और किसानों के हित—तीनों पर भारी असर पड़ेगा।
खबर के बाद हुई कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निगरानी और जवाबदेही ही व्यवस्था को पटरी पर ला सकती है। अब सबकी नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी, या फिर मामला दब जाएगा?

