गणेश प्रतिमा से लगता है जीव हत्या दोष!

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सिवनी । गणेश चतुर्थी 2019 इस बार 2 सितम्बर को मनाई जाएगी। इसी दिन से प्रथम पूज्य और जन जन के प्रिय भगवान गणेश की घर घर स्थापना होगी। लोग भगवान का दस दिन पूजन वंदन कर समस्त दुःखों से मुक्ति पाने, सुख समृद्धि और रिद्धि सिद्धि की कामना करेंगे। गणेश जी के भक्त अभी से प्रतिमाओं को विराजमान करने की खास तैयारियों में जुट गए हैं।

वहीं प्रतिमाओं का बाजार भी सजने लगा है। हर कोई चाहता है उसके घर सबसे सुंदर गणेश प्रतिमा विराजे, लेकिन क्या आपको ये पता है कि गणेश प्रतिमा से जीव हत्या दोष भी लगता है। चौंकिए मत ये बात शत प्रतिशत सत्य है। यदि आप भी गणेश प्रतिमा घर पर लाने वाले हैं तो इस बात जरूर ध्यान रखें की प्रतिमा से भगवान प्रसन्न हों, लेकिन किसी जीव की हत्या का दोष न लगे।

इनसे लगता है हत्या दोष : नर्मदा चिंतक समर्थ भैयाजी सरकार के अनुसार गणेश प्रतिमाओं का निर्माण जब तक प्राकृतिक चीजों से होता है, तब तक वे पुण्यदायी होती हैं। लेकिन प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी प्रतिमाएं देखने की सुंदर हैं, बाकी ये पर्यावरण के लिए जहर का काम करती हैं।

उन्होंने बताया कि इनका विसर्जन जब तालाबों, नदियों या किसी भी जल स्रोत में किया जाता है तो वहां के जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ जाता है। जिससे जीव हत्या का दोष लगता है। जो शास्त्र सम्मत उचित भी नहीं है। पूजन और मूर्ति की सुंदरता के चक्कर में हम पाप के भागीदार बन रहे हैं। पुण्य मिलने के बजाये हमें कई प्रकार के दोष लग रहे हैं। हम डरा नहीं रहे बल्कि यही सच है।

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शहर में गणेशोत्सव पर घर-घर में मूर्तियां स्थापित की जाती है। इसके चलते बड़ी संख्या में मूर्तियों की बिक्री होती है। इस मौके पर कुछ व्यापारी प्लास्टर ऑफ पेरिस और कैमिकल रंगों की मूर्तियां बेचकर मोटा मुनाफे कमाने की फिराक में रहते है। इनके विसर्जन से पानी जहरीला बन जाता है। पर्व करीब आने के साथ ही शहर में पीओपी से मूर्तियों की बाहर से खेप आना शुरू हो गई है। लेकिन मूर्तियों की जांच और उनके विरुद्ध कार्रवाई ठप है।

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