सिवनी। वैशाख माह की शुरुआत के साथ ही जिले में भीषण गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी और उमस भरे मौसम के कारण हालात ऐसे बन गए हैं कि छोटे बच्चे लू (हीट स्ट्रोक) की चपेट में आने लगे हैं। कई मामलों में बच्चों के बेहोश होने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है।
40°C के पार तापमान, बच्चों की सेहत पर खतरा
मौसम की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। सोशल मीडिया पर भी आपातकालीन चेतावनियां जारी की जा रही हैं, जिनमें कहा गया है कि—
- तापमान 45°C से 55°C तक पहुंच सकता है
- करीब 70% तक सीधी UV किरणें पड़ने की संभावना है
- कई क्षेत्रों में गर्म हवाएं (लू) चल सकती हैं
- खुले में निकलना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है
ऐसे हालात में सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों पर पड़ रहा है।
अभिभावकों में असंतोष, बच्चों को भेजने में हिचक
वर्तमान स्कूल समय को लेकर अभिभावकों में असंतोष साफ दिखाई दे रहा है। कई अभिभावक गर्मी के कारण बच्चों को स्कूल भेजने में आनाकानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि सुबह देर से शुरू होने वाले स्कूल समय के कारण बच्चे तेज धूप और गर्मी में घर लौटते हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है।
अन्य जिलों में बदल चुका है स्कूल टाइम
प्रदेश के कई पड़ोसी जिलों में स्थिति को देखते हुए स्कूल समय में बदलाव किया जा चुका है। वहां स्कूल अब सुबह 7 बजे से 12 बजे तक संचालित किए जा रहे हैं, जिससे बच्चों को गर्मी से राहत मिल रही है।
सिवनी में भी समय परिवर्तन की मांग तेज
खबर सत्ता के मुख्य संपादक शुभम शर्मा ने इस समाचार के माध्यम से नवागत कलेक्टर नेहा मीना (जिला प्रशासक) से मांग की है कि—
- सिवनी जिले में भी अन्य जिलों की तरह स्कूल समय बदला जाए
- स्कूलों का संचालन सुबह 7:30 बजे से 12:30 बजे तक किया जाए
- यह व्यवस्था नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक लागू हो
उनका मानना है कि इससे बच्चों को पढ़ाई में आसानी होगी और वे लू और गर्मी के प्रभाव से सुरक्षित रहेंगे।
स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस भीषण गर्मी में बच्चों को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। लू, डिहाइड्रेशन और सांस संबंधी समस्याओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में प्रशासन को समय रहते निर्णय लेना जरूरी है।
प्रशासन से संवेदनशील निर्णय की अपील
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील और त्वरित निर्णय लिया जाए। यदि समय रहते स्कूल समय में बदलाव किया जाता है, तो यह हजारों बच्चों के लिए राहत भरा कदम साबित हो सकता है।

