सिवनी (मध्य प्रदेश) के बरघाट क्षेत्र के धारनाकला जंगल से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। महुआ चुनने गए एक आदिवासी युवक को बाघ ने अपना शिकार बना लिया, जिससे पूरे इलाके में भय और दहशत का माहौल बन गया है। लगातार हो रही घटनाओं ने अब ग्रामीणों की चिंता और गहरी कर दी है।
महुआ चुनने गया था, मौत बनकर आया बाघ
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम डोरली निवासी विनोद उईके (32 वर्ष) सुबह अपने परिवार के साथ जंगल में महुआ चुनने गया था। उसके साथ माता-पिता और छोटा भाई भी मौजूद थे।
जंगल घना होने के कारण सभी अलग-अलग दिशाओं में महुआ बीनने लगे। इसी दौरान अचानक घात लगाए बैठे बाघ ने विनोद पर हमला कर दिया। हमला इतना तेज और खतरनाक था कि विनोद को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
बाघ ने विनोद के शव को घसीटते हुए जंगल के भीतर एक नाली में ले जाकर रख दिया।
छोटे भाई ने देखा बाघ, मचाया शोर
विनोद के छोटे भाई पंकज ने सबसे पहले बाघ को देखा। उसने तुरंत शोर मचाया, जिससे आसपास मौजूद अन्य ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे।
लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी — बाघ अपना शिकार कर चुका था।
घटना के समय पूरा परिवार जंगल में ही मौजूद था, जबकि मृतक की पत्नी गर्भवती होने के कारण घर पर थी। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
सरकार की मदद: 8 लाख मुआवजा, तत्काल सहायता भी
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग हरकत में आया। वन विकास निगम बेहरई के रेंजर रवि प्रसाद गेडाम अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
इसके बाद एसडीओ अनिल छत्री भी घटनास्थल पहुंचे और शासन की ओर से:
- ₹8 लाख मुआवजा देने की घोषणा
- तत्काल राहत के रूप में ₹20,000 की सहायता राशि
प्रदान की गई। वन विभाग ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सिवनी भेजा और अंतिम संस्कार तक पूरी टीम मौके पर मौजूद रही।
2 महीनों में चौथी घटना: बढ़ता खतरा
यह घटना कोई पहली नहीं है। पिछले दो महीनों में बाघ के हमले की यह चौथी घटना है, जिसमें अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है।
कुछ दिन पहले ही आष्टा के जंगल में भी एक युवक को बाघ ने अपना शिकार बनाया था।
लगातार बढ़ती घटनाओं से यह साफ है कि जंगल के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा अब गंभीर सवाल बन चुकी है।
वन विभाग की अपील: जंगल न जाएं, सतर्क रहें
वन विकास निगम बेहरई के रेंजर ने लोगों से अपील की है कि:
- महुआ चुनने के लिए जंगल में न जाएं
- अकेले जंगल में प्रवेश न करें
- समूह में रहें और सतर्कता बरतें
वन विभाग द्वारा बाघ की लगातार सर्चिंग ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है, ताकि खतरे को कम किया जा सके।
डर और जरूरत के बीच फंसे ग्रामीण
महुआ जैसे वन उत्पादों पर निर्भर गरीब आदिवासी परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि रोजगार और जीवन के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
एक तरफ पेट पालने की मजबूरी, तो दूसरी तरफ जान का खतरा — यही सिवनी के जंगलों की कड़वी सच्चाई बन चुकी है।
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