स्व. पिता की याद में 13 लाख खर्च कर कच्चे रास्ते को बनाया ‘विश्व स्तरीय सड़क’ में!

0
165

असम के डिब्रूगढ़ की एक सड़क पर आप चलेंगे तो लगेगा कि आप कहीं विदेश में हैं। इस सड़क का नाम है हेरम्बा बारदोलोई पथ!

इस सड़क का निर्माण करवाया है गौतम बारदोलोई ने और इस सड़क का नाम उनके पिता हेरम्बा बारदोलोई के नाम पर है। हेरम्बा एक सामाजिक कार्यकर्ता थे। डिब्रूगढ़ की ‘पहली विश्व-स्तरीय सड़क,’ जिस पर सोलर स्ट्रीट लाइट, अच्छा ड्रेनेज सिस्टम और सड़क के दोनों तरफ बाग़ भी है।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बोइरगिमोथ के निवासियों ने बताया कि यह सड़क कभी कच्चा रास्ता हुआ करती थी। बरसात के दिनों में लोगों का इस रास्ते से जाना मुहाल हो जाया करता था। 50-वर्षीय प्रतिमा दास ने कहा कि पहले ये रास्ता एक बड़े-गड्ढे से कम नहीं था। बारिश में घुटनों तक पानी भर जाता था। पर आज, कोई भी इस बदलाव को शब्दों में बयान नहीं कर सकता है।

लेकिन यह बदलाव आया कैसे?

बोइरगिमोथ इलाके की यह सबसे पुरानी सड़क है। इस कॉलोनी में हजारों लोग रहते हैं। साल 2008 में इस गली को गौतम के पिता हेरम्बा बारदोलोई का नाम दिया गया और संयोग से, उसी वर्ष शहर के इस महान समाजसेवी का निधन हो गया था।


गौतम बारदोलोई 

गौतम ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “जब दिब्रूगढ़ नगर पालिका ने इस सड़क का नाम मेरे पिता के नाम पर रखा तो यह बहुत गर्व की बात थी। लेकिन इस सड़क की हालत बहुत ही दयनीय थी।”

इसलिए गौतम ने इस रास्ते की कायापलट करने का निर्णय किया। गौतम ने बताया, “मेरे पिता पत्रकार थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन लोगों की भलाई के लिए समर्पित किया। साल 1968 में बाढ़ के दौरान उन्होंने अकेले एक मछुआरे समुदाय के पुनर्वास में मदद की। उन्होंने उनके लिए जमीन के कागज़ात तैयार करवाए, लाइब्रेरी बनवाई और साथ ही, एक प्रार्थना घर भी। मेरी माँ को आज भी उस गाँव में हर साल बिहू पर मेरे पिता की जगह झंडा फहराने के लिए बुलाया जाता है।”

गौतम ने सड़क का पुनर्निर्माण कार्य साल 2013 में शुरू किया और इसके बीच वे डिब्रूगढ़ और होंगकोंग के बीच यात्रा करते रहते क्योंकि उनका काम होंगकोंग में है।

उन्होंने कुछ स्थानीय लड़कों को संगठित किया और सड़क को लगभग डेढ़-फ़ीट तक ऊँचा करने के लिए रास्ते को भरना शुरू किया। उन्होंने बाद में व्यक्तिगत घरों के दरवाजे के सामने पीवीसी पॉवर ब्लॉक का भी उपयोग किया। हालांकि, इस रास्ते को मॉडर्न सड़क में तब्दील करने के लिए असल काम साल 2017 में शुरू हुआ।

“मैंने सबसे पहले ड्रेनेज सिस्टम पर काम किया क्योंकि इसके ना होने के कारण ही हर बार बारिश में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी। इसके बाद हमने सड़क के दोनों तरफ बगीचा लगाना शुरू किया। कुछ स्थानीय लड़कों ने मेरी सड़क को पेंट करने में भी मदद की,” गौतम ने कहा।

उन्होंने 178 मीटर लम्बी सड़क के दोनों तरफ बगीचा लगाया है, जिसमें उन्होंने पपीता, हल्दी और धनिया आदि जैसे पेड़ लगाए हैं। “मैं एक आदर्श विश्व स्तरीय सड़क बनाना चाहता था,” गौतम ने मुस्कुराते हुए कहा।


इस सड़क पर सोलर लाइट्स भी लगी हुई हैं और साथ ही, फुटपाथ मार्कर, रबर स्पीड ब्रेकर आदि भी हैं। दीवारों पर विनाइल पोस्टर लगाये गये हैं जिन पर सफाई और सड़क सुरक्षा के संदेश हैं।

वैसे तो, गौतम इस काम की वास्तविक लागत के बारे में अनिश्चित हैं, लेकिन वह अनुमान लगाते हैं कि इसमें करीब 13 लाख रुपये लगे है!

“यह करने में मुझे पांच साल लगे। लोग सबसे पहले मुझसे पूछते हैं, ‘आपका कितना पैसा खर्च हुआ? क्या यह एक सामुदायिक पहल थी?’ जब मैं बताता हूँ कि मैंने अकेले किया है तो लोग चौंक जाते हैं। लेकिन यह चौंकने वाली बात नहीं है। मेरे पिता ने अपना पूरा जीवन सामाजिक सेवा में समर्पित किया। यह तो कम से कम मैं कर ही सकता था,” गौतम कहते हैं।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.