ई-पंचायत योजना को जमकर लग रहे घुन!

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ग्राम पंचायतों के कंप्यूटर बढ़ा रहे सरपंच-सचिवों के घर की शोभा

घंसौर । आदिवासी बाहुल्य घंसौर क्षेत्र की 77 पंचायतों को ई पंचायत बनाने की गरज से वर्ष 2013 में लगभग 21 लाख रूपये की लागत से खरीदे गये कंप्यूटर्स ग्राम पंचायतों की बजाय सरपंच या सचिवों के घरों की शोभा बढ़ा रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार घंसौर और केदारपुर क्षेत्र की सभी 77 ग्राम पंचायत को ई-पंचायत बनाने के लिये शासन द्वारा वर्ष 2013 में 20 लाख 80 हजार रूपये व्यय किये गये थे। ई-पंचायत योजना के तहत सभी ग्राम पंचायत को जिला पंचायत विभाग की ओर से कंप्यूटर सिस्टम दिये गये थे, लेकिन वर्तमान में यह सिस्टम पंचायत भवानों में नहीं लगाये गये हैं, बल्कि ये कंप्यूटर सिस्टम सचिव और सरपंच अपने घर में इनका उपयोग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि ग्राम पंचायत को ई-पंचायत बनाने और यहाँ होने वाले काम को ऑनलाईन और पारदर्शी बनने की सोच से जिला पंचायत द्वारा 01 लाख 20 हजार की लागत से पंचायत को दो साल पहले मॉनीटर, सीपीयू, इन्वर्टर, की-बोर्ड, माऊस, यूएसबी डिवाईस, बड़ी एलसीडी, इंटरनेट सेटअप सहित अन्य सामान दिया गया था, लेकिन उसके बाद भी पंचायत कार्य कंप्यूटर से नहीं हो रहा है। इससे ग्रामीणों को अपने काम के लिये परेशान होना पड़ रहा है।

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सरपंच-सचिवों के घर रखे कंप्यूटर : पंचायत में कंप्यूटर पर काम के लिये जरूरी इंटरनेट सेवा न होने के कारण कई पंचायत के कम्प्यूटर को सरपंच, सचिवों ने अपने घर में रख लिया है जिन पर उनके परिजन अपना निजि काम कर रहे हैं। कुछ पंचायतों में कंप्यूटर सिस्टम सचिव और सरपंच ने बेच भी दिये बताये जाते हैं। इन परिस्थितियों में ग्रामीणों को जरा जरा से काम के लिये जनपद पंचायत कार्यालय की दौड़ लगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कहा जा रहा है कि ग्रामीण अंचल के दौरे पर जाने वाले जिले के अधिकारियों को इस बारे में सब कुछ पता होने के बाद भी किसी के द्वारा भी इस मामले में किसी तरह की कार्यवाही नहीं की जाती है।

सचिवों को है चोरी होने का डर : घंसौर और शिकारा क्षेत्र में अधिकांश ग्राम पंचायत के पास कार्यालय के लिये भवन ही नहीं है। वहीं जिन पंचायत के कार्यालय अपने स्वयं के भवन में हैं, वे भवन काफी जर्जर हो चुके हैं। ऐसी परिस्थिति में सचिवोें को कार्यालय की बजाय घर पर कंप्यूटर रखने का बहाना मिल जाता है।

कुछ सचिवों का कहना है कि पंचायत के कार्यालयों में सुरक्षा के मुकम्मल इंतजामात नहीं होने के कारण लाखों की सामग्री चोरी होने का भय उन्हें सताता रहा है। जबकि ये सिस्टम ग्राम पंचायतों को इसलिये प्रदाय किये गये थे ताकि ग्राम पंचायतों का कार्य आसानी से हो सके और रिकॉर्ड का संधारण भी करीने से किया जा सके।

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